
– खनिज विभाग पर मिलीभगत का आरोप
द सुपरहिट न्यूज
फतेहपुर । जनपद के अढ़ावल स्थित यमुना नदी के मोरंग खनन खंडों में अवैध खनन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। याचिकाकर्ता अभिषेक ने एनजीटी में वाद दाखिल कर खनन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और पर्यावरण स्वीकृति (EC) की शर्तों की अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
याचिका में कहा गया है कि अढ़ावल क्षेत्र के यमुना नदी खंडों में नियम विरुद्ध तरीके से खनन कराया जा रहा है। आरोप है कि नदी की सक्रिय जलधारा से छेड़छाड़ कर अस्थाई पुल बनाया गया और उन्हीं के माध्यम से भारी मशीनों से खनन कार्य कराया जा रहा है। कई-कई मीटर गहरे गड्ढे खोदकर मोरंग निकाले जाने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की बात भी कही गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि रात-दिन प्रतिबंधित मशीनों से खनन कर एनजीटी गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वहीं खनन कार्यों में पर्यावरण स्वीकृति (EC) की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा। अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन रोकने में खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि कार्रवाई के नाम पर केवल मामूली जुर्माना लगाकर खदान संचालकों को बचाया जा रहा है। अढ़ावल-11 खंड में जलधारा बांधकर अवैध खनन कराने और खनिज विभाग की मिलीभगत से सोमेंद्र सिंह द्वारा मनमाने तरीके से संचालन किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा अढ़ावल-2 के पट्टाधारक बाबू गुप्ता पर भी पट्टा क्षेत्र से बाहर हटकर अवैध खनन करने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि क्षेत्र से बाहर खनन किए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामले में एनजीटी से उच्च स्तरीय संयुक्त समिति गठित कर जांच कराने और अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही अवैध खनन न रुकने पर सख्त आदेश जारी करने की अपील भी की गई है।
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