
– जानिए चाय पीने पर क्यों हुई चक्कलस !
द सुपरहिट न्यूज ( विवेक मिश्र )
लखनऊ । फतेहपुर जनपद में एक साधारण चाय की दुकान अब सियासत और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav के चाय पीने के बाद शुरू हुई हलचल ने जिले का माहौल गरमा दिया है।

मामला सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के चौकी चौराहे स्थित शेषमणि/आर्यन की चाय दुकान से जुड़ा है। 15 अप्रैल को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दुकान पर छापेमारी कर चाय का नमूना जांच के लिए भेजा। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि यह कार्रवाई अखिलेश यादव के चाय पीने के चलते की गई है।
हालांकि सहायक आयुक्त खाद्य राजेश दीक्षित ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि 1 अप्रैल को आईजीआरएस के माध्यम से चाय पत्ती में मिलावट की शिकायत मिली थी, उसी के आधार पर जांच की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुकान का लाइसेंस 2028 तक वैध है और विभाग के पास सीधे दुकान सीज करने का प्रावधान नहीं है। साथ ही यह भी बताया कि उसी दिन अन्य स्थानों पर भी नियमित जांच अभियान चलाया गया था।

वहीं दूसरी ओर, खुद को “आर्यन चाय वाला” बताने वाले दुकानदार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि 20 फरवरी को अखिलेश यादव के चाय पीने के बाद से ही उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। उसने छापेमारी के साथ मारपीट और पैसे के विवाद में उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पलायन तक की बात कही है। इस मामले में पुलिस का अलग पक्ष सामने आया है। खागा क्षेत्राधिकारी दुर्गेश दीप के अनुसार 17 अप्रैल को मारपीट, गाली-गलौज और धमकी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि प्रारंभिक जांच में लूट और छेड़छाड़ के आरोपों के साक्ष्य नहीं मिले, जिसके चलते संबंधित धाराएं हटा दी गई हैं। फिलहाल तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर कार्रवाई जारी है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेता शिवाकांत तिवारी सहित अन्य दलों ने इसे प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुल मिलाकर, एक चाय की दुकान से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई, पुलिस जांच और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझ गया है। सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।